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    •     bn:01531352n     •     NOUN     •     Concept    •     Updated on 2019/05/03

  الموسيقى الكلاسيكية الهندية From automatic translation

 Indian classical music is the classical music of the Indian subcontinent. Wikipedia

    •     bn:01531352n     •     NOUN     •     Concept    •     Updated on 2019/05/03     •     Categories: 传统音乐, 印度音乐

  印度传统音乐 · 印度斯坦古典音乐

印度传统音乐包含了南印度、北印度与巴基斯坦地区的三种传统音乐的总称,形成时间可远溯自12世纪之前。 Wikipedia

    •     bn:01531352n     •     NOUN     •     Concept    •     Updated on 2019/05/03     •     Categories: Indian classical music

  Indian classical music · Classical Indian music · Sangeeta · Sangita · Shastriya gana

Indian classical music is the classical music of the Indian subcontinent. Wikipedia

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Ancient music and music theories from the Indian subcontinent Wikidata

    •     bn:01531352n     •     NOUN     •     Concept    •     Updated on 2019/05/03     •     Categories: Musique indienne

  Musique classique indienne

La musique classique indienne est un genre de musique d'Asie du Sud Elle a deux traditions majeures : la musique classique indienne du nord appelée musique hindoustanie, tandis que la musique classique indienne du sud est appelée musique carnatique. Wikipedia

    •     bn:01531352n     •     NOUN     •     Concept    •     Updated on 2019/05/03     •     Categories: Musik (Indien)

  Klassische indische Musik

Die klassische indische Musik wurde in der gesamten indischen Geschichte in der Oberschicht, vor allem an Fürstenhöfen gepflegt. Wikipedia

    •     bn:01531352n     •     NOUN     •     Concept    •     Updated on 2019/05/03

  ινδική κλασσική μουσική · κλασική ινδική μουσική From automatic translation

 Indian classical music is the classical music of the Indian subcontinent. Wikipedia

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 Indian classical music is the classical music of the Indian subcontinent. Wikipedia

    •     bn:01531352n     •     NOUN     •     Concept    •     Updated on 2019/05/03     •     Categories: भारत का इतिहास, भारतीय शास्त्रीय संगीत, भारतीय संगीत, संगीत...

  भारतीय संगीत का इतिहास · शास्त्रीय संगीत · भारतीय शास्त्रीय संगीत · पाश्चात्य शास्त्रीय संगीत

प्रगैतिहासिक काल से ही भारत में संगीत कीसमृद्ध परम्परा रही है। गिने-चुने देशों में ही संगीत की इतनी पुरानी एवं इतनी समृद्ध परम्परा पायी जाती है। माना जाता है कि संगीत का प्रारम्भ सिंधु घाटी की सभ्यता के काल में हुआ हालांकि इस दावे के एकमात्र साक्ष्य हैं उस समय की एक नृत्य बाला की मुद्रा में कांस्य मूर्ति और नृत्य, नाटक और संगीत के देवता रूद्र अथवा शिव की पूजा का प्रचलन। सिंधु घाटी की सभ्यता के पतन के पश्चात् वैदिक संगीत की अवस्था का प्रारम्भ हुआ जिसमें संगीत की शैली में भजनों और मंत्रों के उच्चारण से ईश्वर की पूजा और अर्चना की जाती थी। इसके अतिरिक्त दो भारतीय महाकाव्यों - रामायण और महाभारत की रचना में संगीत का मुख्य प्रभाव रहा। भारत में सांस्कृतिक काल से लेकर आधुनिक युग तक आते-आते संगीत की शैली और पद्धति में जबरदस्त परिवर्तन हुआ है। भारतीय संगीत के इतिहास के महान संगीतकारों जैसे कि स्वामी हरिदास, तानसेन, अमीर खुसरो आदि ने भारतीय संगीत की उन्नति में बहुत योगदान किया है जिसकी कीर्ति को पंडित रवि शंकर, भीमसेन गुरूराज जोशी, पंडित जसराज, प्रभा अत्रे, सुल्तान खान आदि जैसे संगीत प्रेमियों ने आज के युग में भी कायम रखा हुआ है। भारतीय संगीत में यह माना गया है कि संगीत के आदि प्रेरक शिव और सरस्वती है। इसका तात्पर्य यही जान पड़ता है कि मानव इतनी उच्च कला को बिना किसी दैवी प्रेरणा के, केवल अपने बल पर, विकसित नहीं कर सकता। == सक्षिप्त परिचय == वैदिक युग में ‘संगीत’ समाज में स्थान बना चुका था। सबसे प्राचीन ग्रन्थ ‘ऋग्वेद’ में आर्यो के आमोद-प्रमोद का मुख्य साधन संगीत को बताया गया है। अनेक वाद्यों का आविष्कार भी ऋग्वेद के समय में बताया जाता है। ‘यजुर्वेद’ में संगीत को अनेक लोगों की आजीविका का साधन बताया गया, फिर गान प्रधान वेदसामवेद’ आया, जिसे संगीत का मूल ग्रन्थ माना गया। ‘सामवेद’ में उच्चारण की दृष्टि से तीन और संगीत की दृष्टि से सात प्राकार के स्वरों का उल्लेख है। ‘सामवेद’ का गान मेसोपोटामिया, फैल्डिया, अक्कड़, सुमेर, बवेरु, असुर, सुर, यरुशलम, ईरान, अरब, फिनिशिया व मिस्र के धार्मिक संगीत से पर्याप्त मात्रा में मिलता-जुलता था। उत्तर वैदिक काल के ‘रामायण’ ग्रन्थ में भेरी, दुंदभि, वीणा, मृदंग व घड़ा आदि वाद्य यंत्रों व भँवरों के गान का वर्णन मिलता है, तो ‘महाभारत’ में कृष्ण की बाँसुरी के जादुई प्रभाव से सभी प्रभावित होते हैं। अज्ञातवास के दौरान अर्जुन ने उत्तरा को संगीत-नृत्य सिखाने हेतु बृहन्नला का रूप धारण किया। पौराणिक काल के ‘तैत्तिरीय उपनिषद’, ‘ऐतरेय उपनिषद’, ‘शतपथ ब्राह्मण’ के अलावा ‘याज्ञवल्क्य-रत्न प्रदीपिका’, ‘प्रतिभाष्यप्रदीप’ और ‘नारदीय शिक्षा’ जैसे ग्रन्थों से भी हमें उस समय के संगीत का परिचय मिलता है। चौथी शताब्दी में भरत मुनि ने ‘नाट्यशास्त्र’ के छ: अध्यायों में संगीत पर ही चर्चा की। इनमें विभिन्न वाद्यों का वर्णन, उनकी उत्पत्ति, उन्हें बजाने के तरीकों, स्वर, छन्द, लय व विभिन्न कालों के बारे में विस्तार से लिखा गया है। इस ग्रन्थ में भरत मुनि ने गायकों और वादकों के गुणों और दोषों पर भी खुलकर लिखा है। बाद में छ: राग ‘भैरव’, ‘हिंडोल’, ‘कैशिक’, ‘दीपक’, ‘श्रीराग’ और ‘मेध’ प्रचार में आये। पाँचवीं शताब्दी के आसपास मतंग मुनि द्वारा रचित महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ ‘वृहददेशी’ से पता चलता है कि उस समय तक लोग रागों के बारे में जानने लगे थे। लोगों द्वारा गाये-बजाये जाने वाले रागों को मतंग मुनि ने देशी राग कहा और देशी रागों के नियमों को समझाने हेतु ‘वृहद्देशी’ ग्रन्थ की रचना की। मतंग ही पहले व्यक्ति थे जिन्होंने अच्छी तरह से सोच-विचार कर पाया कि चार या पाँच स्वरों से कम में राग बन ही नहीं सकता। पाणिनी के ‘अष्टाध्यायी’ में भी अनेक वाद्यों जैसे मृदंग, झर्झर, हुड़क तथा गायकों व नर्तकों सम्बन्धी कई बातों का उल्लेख है। सातवीं–आठवीं शताब्दी में ‘नारदीय शिक्षा’ और ‘संगीत मकरंद’ की रचना हुई। ‘संगीत मकरंद’ में राग में लगने वाले स्वरों के अनुसार उन्हें अलग-अलग वर्गों में बाँटा गया है और रागों को गाने-बजाने के समय पर भी गम्भीरता से सोचा गया है। ग्यारहवीं शताब्दी में मुसलमान अपने साथ फारस का संगीत लाए। उनकी और हमारी संगीत पद्धतियों के मेल से भारतीय संगीत में काफी बदलाव आया। उस दौर के राजा-महाराजा भी संगीत-कला के प्रेमी थे और दूसरे संगीतज्ञों को आश्रय देकर उनकी कला को निखारने-सँवारने में मदद करते थे। बादशाह अकबर के दरबार में 36 संगीतज्ञ थे। उसी दौर के तानसेन, बैजूबावरा, रामदास व तानरंग खाँ के नाम आज भी चर्चित हैं। जहाँगीर के दरबार में खुर्रमदाद, मक्खू, छत्तर खाँ व विलास खाँ नामक संगीतज्ञ थे। कहा जाता है कि शाहजहाँ तो खुद भी अच्छा गाते थे और गायकों को सोने-चाँदी के सिक्कों से तौलवाकर ईनाम दिया करते थे। मुगलवंश के एक और बादशाह मुहम्मदशाह रंगीले का नाम तो कई पुराने गीतों में आज भी मिलता है। ग्वालियर के राजा मानसिंह भी संगीत प्रेमी थे। उनके समय में ही संगीत की खास शैली ‘ध्रुपद’ का विकास हुआ। 12वीं शताब्दी में संगीतज्ञ जयदेव ने 'गीतगोविन्द' नामक संस्कृत ग्रन्थ लिखा, इसे सकारण ‘अष्टपदी’ भी कहा जाता है। तेरहवीं शताब्दी में पण्डित शार्ंगदेव ने ‘संगीतरत्नाकर’ की रचना की। इस ग्रन्थ में अपने दौर के प्रचलित संगीत और भरत व मतंग के समय के संगीत का गहन अध्ययन मिलता है। सात अध्यायों में रचे होने के कारण इस उपयोगी ग्रन्थ को 'सप्ताध्यायी' भी कहा जाता है। शारंगदेव द्वारा रचित ‘संगीत रत्नाकर’ के अतिरिक्त चौदहवीं शताब्दी में विद्यारण्य द्वारा ‘संगीत सार’, पन्द्रहवीं शताब्दी में लोचन कवि द्वारा ‘राग तरंगिणी’, सोलहवीं शताब्दी में पुण्डरीक विट्ठल द्वारा ‘सद्रागचंद्रोदय’, रामामात्य द्वारा ‘स्वरमेल कलानिधि’, सत्रहवीं शताब्दी में हृदयनारायण देव द्वारा ‘हृदय प्रकाश’ व ‘हृदय कौतुकम्’, व्यंकटमखी द्वारा ‘चतुर्दंर्डिप्रकाशिका’, अहोबल द्वारा‘संगीत पारिजात’, दामोदर पण्डित द्वारा ‘संगीत दर्पण,’ भावभट्ट द्वारा ‘अनूप विलास’ व ‘अनूप संगीत रत्नाकार’, सोमनाथ द्वारा 'अष्टोत्तरशतताल लक्षणाम' और अठारहवीं शताब्दी में श्रीनिवास पण्डित द्वारा ‘राग तत्व विबोधः’, तुलजेन्द्र भोंसले द्वारा ‘संगीत सारामृतम्’ व ‘राग लक्षमण्’ ग्रन्थों की रचना हुई। स्वामी हरिदास, विट्ठल, कृष्णदास, त्यागराज, मुथ्थुस्वामी दीक्षितर और श्यामा शास्त्री जैसे अनेक संत कवि–संगीतज्ञों ने भी उत्तर आदि दक्षिण भारत के संगीत को अनगिनत रचनाएँ दीं। कहा जा सकता है कि भारतीय संगीत शताब्दियों के प्रयास व प्रयोग का परिणाम है। == वैदिक काल का संगीत == भारतीय संगीत का आदि रूप वेदों में मिलता है। वेद के काल के विषय में विद्वानों में बहुत मतभेद है, किंतु उसका काल ईसा से लगभग 2000 वर्ष पूर्व था - इसपर प्राय: सभी विद्वान् सहमत है। इसलिए भारतीय संगीत का इतिहास कम से कम ४००० वर्ष प्राचीन है। वेदों में वाण, वीणा और कर्करि इत्यादि तंतु वाद्यों का उल्लेख मिलता है। अवनद्ध वाद्यों में दुदुंभि, गर्गर इत्यादि का, घनवाद्यों में आघाट या आघाटि और सुषिर वाद्यों में बाकुर, नाडी, तूणव, शंख इत्यादि का उल्लेख है। यजुर्वेद में ३०वें कांड के १९वें और २०वें मंत्र में कई [वाद्य]] बजानेवालों का उल्लेख है जिससे प्रतीत होता है कि उस समय तक कई प्रकार के वाद्यवादन का व्यवसाय हो चला था। संसार भर में सबसे प्राचीन संगीत सामवेद में मिलता है। उस समय "स्वर" को "यम" कहते थे। साम का संगीत से इतना घनिष्ठ संबंध था कि साम को स्वर का पर्याय समझने लग गए थे। छांदोग्योपनिषद् में यह बात प्रश्नोत्तर के रूप में स्पष्ट की गई है। "का साम्नो गतिरिति? Wikipedia

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भारतीय शास्त्रीय संगीत या मार्ग, भारतीय संगीत का अभिन्न अंग है। शास्त्रीय संगीत को ही ‘क्लासिकल म्यूजिक भी कहते हैं। शास्त्रीय गायन ध्वनि-प्रधान होता है, शब्द-प्रधान नहीं। इसमें महत्व ध्वनि का होता है । इसको जहाँ शास्त्रीय संगीत-ध्वनि विषयक साधना के अभ्यस्त कान ही समझ सकते हैं, अनभ्यस्त कान भी शब्दों का अर्थ जानने मात्र से देशी गानों या लोकगीत का सुख ले सकते हैं। इससे अनेक लोग स्वाभाविक ही ऊब भी जाते हैं पर इसके ऊबने का कारण उस संगीतज्ञ की कमजोरी नहीं, लोगों में जानकारी की कमी है। Wikipedia

    •     bn:01531352n     •     NOUN     •     Concept    •     Updated on 2019/05/03     •     Categories: Musica classica indiana

  Musica classica indiana · Musica indiana

Le origini della musica classica indiana sono tracciate a partire dai più antichi libri di sacre scritture della tradizione indù, i Veda. Wikipedia

    •     bn:01531352n     •     NOUN     •     Concept    •     Updated on 2019/05/03     •     Categories: 伝統音楽, インドの文化, 民族音楽, インドの音楽

  インドの伝統音楽 · インド古典音楽

インドの伝統音楽(marga)の発祥は、最古の文書でヒンドゥー伝承のひとつヴェーダに見ることができる。 Wikipedia

    •     bn:01531352n     •     NOUN     •     Concept    •     Updated on 2019/05/03     •     Categories: Академическая музыка, Индийская классическая музыка, Индуистская музыка

  Индийская классическая музыка

Индийская классическая музыка — одна из древнейших комплексных музыкальных традиций мира. Wikipedia

    •     bn:01531352n     •     NOUN     •     Concept    •     Updated on 2019/05/03     •     Categories: Historia de la música

  Música clásica de India · Música clásica de la India · Musica clasica de India · Musica clasica de la India · Musica clasica india

La gama de estilos y tradiciones musicales del subcontinente indio, comprende dentro de su contexto a los modernos estados de la India, Pakistán, Nepal, Bangladés y Sri Lanka, está en relación con la descendencia de orden musicoétnico. Wikipedia


 

Translations

الموسيقى الكلاسيكية الهندية
印度传统音乐, 印度斯坦古典音乐, 印 度 古 典 音 乐
indian classical music, classical indian music, sangeeta, sangita, shastriya gana, classical music of india, history of indian music, indian classical, indian classical music and dance, madhyama kala, music history of india
musique classique indienne
klassische indische musik
ινδική κλασσική μουσική, κλασική ινδική μουσική
भारतीय संगीत का इतिहास, शास्त्रीय संगीत, भारतीय शास्त्रीय संगीत, पाश्चात्य शास्त्रीय संगीत
musica classica indiana, Musica indiana
インドの伝統音楽, インド古典音楽
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música clásica de india, Música clásica de la India, Musica clasica de India, Musica clasica de la India, Musica clasica india, Musica clásica de la India, Musica clásica india, Música clasica de la India, Música clasica india, Música clásica india

Sources

Translations from Wikipedia sentences

الموسيقى الكلاسيكية الهندية
印 度 古 典 音 乐
musique classique indienne
ινδική κλασσική μουσική, κλασική ινδική μουσική
भारतीय शास्त्रीय संगीत
musica classica indiana
индийской классической музыки, классической индийской музыки
música clásica de la india
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north Indian classical music, Northern Indian classical music, Indian classical music and dance

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classical singer, music, classical music, Indian, Indian classical music festival, Indian Classical, Indian music, classical musician, classical Indian, classical, Classical, Classical music, North Indian classical music
klassischer Musik, klassischen indischen Musik, klassischen Musik, klassische Musik, klassischen nordindischen Musik, indischen Musik, klassischer indischer Musik, indische Musik
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インド古典音楽, インド音楽
индийскую классическую музыку, индийской классической музыке, Индийской классической музыке

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