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bn:03564504n     •     NOUN     •     Named Entity    •     Updated on 2019/10/30

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 The Nāṭya Śāstra is a Sanskrit text on the performing arts. Wikipedia

bn:03564504n     •     NOUN     •     Named Entity    •     Updated on 2019/10/30

  戏剧论 · 舞乐论

 The Nāṭya Śāstra is a Sanskrit text on the performing arts. Wikipedia

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  Natya Shastra · Natya sastra · Natyasastra · Nāṭya Śāstra · Nāṭyaśāstra

The Nāṭya Śāstra is a Sanskrit text on the performing arts. Wikipedia

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  Nâtya-shâstra · Natya-shastra · Natya Shastra

Le Nâtya-shâstra - du sanskrit nâtya: drame, et, shâstra: traité - est une œuvre encyclopédique de l'hindouisme, antique, donnant les bases du théâtre indien. Wikipedia

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 The Nāṭya Śāstra is a Sanskrit text on the performing arts. Wikipedia

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 The Nāṭya Śāstra is a Sanskrit text on the performing arts. Wikipedia

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 The Nāṭya Śāstra is a Sanskrit text on the performing arts. Wikipedia

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  नाट्य शास्त्र · नाट्यकला · नाट्यशास्त्र · नाट्यशास्‍त्र

नाटकों के संबंध में शास्त्रीय जानकारी को नाट्य शास्त्र कहते हैं। इस जानकारी का सबसे पुराना ग्रंथ भी नाट्यशास्त्र के नाम से जाना जाता है जिसके रचयिता भरत मुनि थे। भरत मुनि का जीवनकाल ४०० ईसापूर्व से १०० ई के मध्य किसी समय माना जाता है। संगीत, नाटक और अभिनय के सम्पूर्ण ग्रंथ के रूप में भारतमुनि के नाट्य शास्त्र का आज भी बहुत सम्मान है। उनका मानना है कि नाट्य शास्त्र में केवल नाट्य रचना के नियमों का आकलन नहीं होता बल्कि अभिनेता, रंगमंच और प्रेक्षक इन तीनों तत्वों की पूर्ति के साधनों का विवेचन होता है। ३७ अध्यायों में भरतमुनि ने रंगमंच, अभिनेता, अभिनय, नृत्यगीतवाद्य, दर्शक, दशरूपक और रस निष्पत्ति से सम्बन्धित सभी तथ्यों का विवेचन किया है। भरत के नाट्य शास्त्र के अध्ययन से यह स्पष्ट हो जाता है कि नाटक की सफलता केवल लेखक की प्रतिभा पर आधारित नहीं होती बल्कि विभिन्न कलाओं और कलाकारों के सम्यक के सहयोग से ही होती है। == परिचय == नाट्य और नृत्त, दृश्य काव्य के ये दो भेद हैं। नट-नटी द्वारा किसी अवस्थाविशेष की अनुकृति नाट्य है - 'नाट्यते अभिनयत्वेन रूप्यते- इति नाट्यम्'। ताल और लय की संगति से अनुबद्ध अनुकृत को नृत्त कहते हैं। ये दोनों ही अभिनय के विषय हैं और ललित कला के अंतर्गत माने जाते हैं। नाट्य के प्रमुख अंग चार हैं - वाचिक, सात्विक, आंगिक और आहार्य। उक्ति-प्रत्युक्ति की यथावत् अनुकृति वाचिक अभिनय का विषय है। भावों का यथावत् प्रदर्शन सात्विक अभिनय है। भावप्रदर्शन के लिए हाथ, पैर, नेत्र, भ्रू, एवं कटि, मुख, मस्तक आदि अंगों की विविध चेष्टाओं की अनुकृति आंगिक अभिनय है। देशविदेश के अनुरूप वेशभूषा, चालढाल, रहन सहन और बोली की अनुकृति आहार्य अभिनय का विषय है। चतुर्विध अभिनय के सहायक नृत्य, गीत, वाद्य एवं गति, वृत्ति, प्रवृत्ति और आसन का अनुसंधान भी नाट्य के अंतर्गत है। इस प्रकार अभिनय के विविध अंग एवं उपांगों के स्वरूप और प्रयोग के आकारप्रकार का विवरण प्रस्तुत कर तत्संबंधी नियम तथा व्यवहार को निर्धारित करनेवाला शास्त्र 'नाट्यशास्त्र' है। अभिनय के अनुरूप स्थान को नाट्यगृह कहते हैं जिसके प्रकार, निर्माण एवं साजसज्जा के नियमों का प्रतिपादन भी नाट्यशास्त्र का ही विषय है। विविध श्रेणी के अभिनेता एवं अभिनेत्री के व्यवहार, परस्पर संलाप और अभिनय के निर्देशन एवं निर्देशक के कर्तव्यों का विवरण भी नाट्यशास्त्र की व्यापक परिधि में समाविष्ट है। इसका मुख्य उद्देश्य ऐहिक जीवन की नाना वेदनाओं से परिश्रांत जनता का मनोरंजन है - यह देव, दानव एवं मानव समाज के लिए आमोद प्रमोद का सरल साधन है। यह नयनों की तृप्ति करनेवाला एवं भावोद्रेक का परिमार्जन कर प्रेक्षकवर्ग का आह्लादित करनेवाला मनोरम अनुसंधान है - यह जातिभेद, वर्गभेद, वयोभेद आदि नैसर्गिक एवं सामाजिक विभेदों से निरपेक्ष, भिन्न रुचि की जनता का सामान्य रूप से समाराधन करनेवाला एक कांत, 'चाक्षुषक्रतु' है। इसके प्रवर्तक स्वयं प्रजापति हैं जिन्होंने ऋग्वेद से पाठ्य, सामवेद से गीत, यजुर्वेद से अभिनय तथा अथर्वांगिरस से रस का परिग्रह कर सार्ववर्णिक पंचम वेद का प्रादुर्भाव किया। उमा-महादेव ने सुप्रीत हो लोकानुरंजन के हेतु लास्य एवं ताण्डव का सहयोग देकर इसे उपकृत किया है। वस्तुत: ऐसा कोई शास्त्र, कोई शिल्प, न कोई विद्या और न कोई कला ऐसी है जिसका प्रतिनिधित्व नाट्यशास्त्र में न हो। इस तरह अनुपम दिव्यता से अनुप्राणित नाट्यशास्त्र के अधिष्ठाता देव की भी कल्पना, इतर वेद एवं वेदांगों के अधिष्ठाताओं की भाँति, की गई है जिसके स्वरूप का उल्लेख 'नृसिंहप्रासाद' नामक ग्रंथ में मिलता है। नाट्यशास्त्रमिदं रम्यं मृगवक्त्रं जटाधरम्। अक्षसूत्रं त्रिशूलं च विभ्रार्णाच त्रिलोचनम्।नाट्य संबंधी नियमों की संहिता का नाम 'नाट्यशास्त्र' है। भारतीय परंपरा के अनुसार नाट्यशास्त्र के आद्य रचयिता स्वयं प्रजापति माने गए हैं और उसे 'नाट्यवेद' कहकर नाट्यकला को विशिष्ट सम्मान प्रदान किया गया है। जिस प्रकार परम पुरुष के निःश्वास से आविर्भूत वेदराशि के द्रष्टा विविध ऋषि प्रकल्पित हैं उसी तरह महादेव द्वारा प्रोक्त नाट्यवेद के द्रष्टा शिलाली, कृशाश्व और भरतमुनि माने गए हैं। शिलाली एवं कृशाश्व द्वारा संकलित नाट्यसंहिताएँ आज उपलब्ध नहीं है, केवल भरत मुनि द्वारा प्रणीत ग्रंथ ही उपलब्ध हुआ है जो 'नाट्यशास्त्र' के नाम से प्रथित है। इसका प्रणयन संभवतः कश्मीर, भारत देश में हुआ। नाट्यशास्त्र का रचनाकाल, निर्माणशैली तथा बहिःसाक्ष्य के आधार पर ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी के लगभग स्थिर किया जा सकता है। == भरतमुनि का नाट्यशास्त्र == इस ग्रन्थ में प्रत्यभिज्ञा दर्शन की छाप है। प्रत्यभिज्ञा दर्शन में स्वीकृत ३६ मूल तत्वों के प्रतीक स्वरूप नाट्यशास्त्र में ३६ अध्याय हैं। पहले अध्याय में नाट्योत्पत्ति, दूसरे में मण्डपविधान देने के पश्चात् अगले तीन अध्यायों में नाट्यारम्भ से पूर्व की प्रक्रिया का विधान वर्णित है। छठे और सातवें अध्याय में रसों और भावों का व्याख्यान है, जो भारतीय काव्यशास्त्र में व्याप्त रससिद्धान्त की आधारशिला है। आठवें और नवें अध्याय में उपांग एवं अंगों द्वारा प्रकल्पित अभिनय के स्वरूप की व्याख्या कर अगले चार अध्यायों में गति और करणों का उपन्यास किया है। अगले चार अध्यायों में छन्द और अलंकारों का स्वरूप तथा स्वरविधान बतालाया है। नाट्य के भेद तथा कलेवर का सांगोपांग विवरण १८वें और १९वें अध्याय में देकर २०वें वृत्ति विवेचन किया है। तत्पश्चात् २९वें अध्याय में विविध प्रकार के अभिनयों की विशेषताएँ दी गई हैं। २९ से ३४ अध्याय तक गीत वाद्य का विवरण देकर ३५वें अध्याय में भूमिविकल्प की व्याख्या की है। अंतिम अध्याय उपसंहारात्मक है। यह ग्रंथ मुख्यत: दो पाठान्तरों में उपलब्ध है १. Wikipedia

bn:03564504n     •     NOUN     •     Named Entity    •     Updated on 2019/10/30     •     Categories: Teatro indiano

  Nātyaśāstra · Natya Sastra · Natyashastra

Il Nātyaśāstra di Bharata è il più importante testo teorico sul teatro classico indiano, comprendente anche la danza e la musica. Wikipedia

bn:03564504n     •     NOUN     •     Named Entity    •     Updated on 2019/10/30

  ガンダルヴァ・ヴェーダ · ナトゥヤ・シャストラ · ナーティヤ・シャーストラ

 The Nāṭya Śāstra is a Sanskrit text on the performing arts. Wikipedia

bn:03564504n     •     NOUN     •     Named Entity    •     Updated on 2019/10/30     •     Categories: Индуистская мифология, Индуистское искусство, История театра, Книги IV века...

  Натья-шастра · Натьяшастра · Гандхарва-веда

«Натьяша́стра» Wikipedia

bn:03564504n     •     NOUN     •     Named Entity    •     Updated on 2019/10/30     •     Categories: Artículos con identificadores BNF, Artículos con identificadores LCCN, Artículos con identificadores VIAF, Cultura hindú...

  Natia-shastra · Natya Shastra · Bharata-śastra · Bharata-śāstra · Bharata śastra

El Natia-shastra es un antiguo tratado de artes dramáticas, teatro, danza y música hinduista. Wikipedia


 

Translations

戏剧论, 舞乐论
natya shastra, natya sastra, natyasastra, nāṭya śāstra, nāṭyaśāstra, bharat natya shastra, bharata natya shastra, bharatanatyashastra, gandharva veda, gandharvaveda, gāndharvaveda, natya-sastra, natya shastra of bharata, natyashasthra, natyashastra, nātya-śāstra, nātya shāstra, nātyashāstra, nātyasāstra, nātyaśāstra
nâtya-shâstra, natya-shastra, natya shastra
नाट्य शास्त्र, नाट्यकला, नाट्यशास्त्र, नाट्यशास्‍त्र
nātyaśāstra, natya sastra, Natyashastra
ガンダルヴァ・ヴェーダ, ナトゥヤ・シャストラ, ナーティヤ・シャーストラ
Натья-шастра, натьяшастра, гандхарва-веда
natia-shastra, Natya Shastra, bharata-śastra, bharata-śāstra, bharata śastra, bharata śāstra, Bharataśāstrá, natya-śastra, natya-śāstra, natya śastra, natya śāstra, Natyashastra, natyaśastra, natyaśāstra, naṭya-śastra, naṭya-śāstra, naṭya śastra, naṭya śāstra, nātya-śāstra, nātya śāstra, nātyaśāstra, Nāṭia śāstrá, nāṭya-śāstra, nāṭya śāstra, teatro hindú

Sources

1 source | 2 senses
3 sources | 24 senses
3 sources | 4 senses
3 sources | 5 senses
3 sources | 4 senses
1 source | 3 senses
3 sources | 4 senses
3 sources | 27 senses

Compounds

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Natya Shastra of Bharata

Other forms

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Nāṭyaśāstra, A Treatise on Theatre, natya, Nātya Shastra
Натья-шастре, Натья-шастры

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